इनकाउटंर का दर्द

इनकाउटंर का दर्द
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थोड़ी देर पहले हमारे एक आईपीएस अधिकारी मित्र फोन आया था इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ के सिलसिले में। उन्होने बातचीत के दौरान मुझसे कई सवाल किये जिसका में जबाव नही दे सका, उम्मीद है आप मुझे उनके सवाल के जबाव में मदद करेगे।
इन अधिकारी से मेरा कोई 10 वर्ष पूराना रिश्ता है। संयोग ऐसा रहा कि इनके साथ कई जिलो में साथ काम करने का मौंका मिला ये एसपी थे तो मैं पत्रकार लेकिन कभी भी मानवाधिकारी या फिर फर्जी मुकदमें को लेकर हमलोगो के बीच टकराव नही हुआ। जब भी मेरी जानकारी में ऐसा कुछ पता चला या फिर मैंने खबर चलाया तो 24 घंटे के अंदर कारवाई हो जाती थी।
लेकिन आज उनके कई सवालो का जबाव मेरे पास नही था सबसे बड़ी बात यह है कि यह सवाल वैसे पुलिस अधिकारी का है जो खुद मानवाधिकार और कानून को लेकर काफी गम्भीर है।इनका पहला सवाल था इशरत जहां इनकाउन्टर में जेल में बंद आईपीएस अधिकारी और इस इंनकाउटर में मारे गये चारो व्यक्ति के बीच पहले से कोई रंजिश थी क्या। दूसरी बात आईपीएस अधिकारी सौ आतंकी को मार गिराये वो सीधे डीजीपी नही बन सकता है ।ठिक है मैंने माना कि पकड़ कर चारो को मारा गया किसके लिए ।
गुजरात देश का एक मात्र राज्य है जहां आतंकी जाने से पहले हजार बार सोचता है पूरे देश में आये दिन आंतकी घटनाये हो रही हैं।आप लोग इनते डिवेट करा रहे है अब लोग इशरत को बिहार से जोड़ रहे हैं अगर पुलिस और सेना इस नजरिया से काम करने लगे तो कितने घंटे चैन से सो सकते हैं हमारे देश की जनता। सीमा पर सेना पड़ोसी मुल्क से फिस्किंग कर ले अंदर पुलिस अपराधियों से मिल जाये कितने देर अराम से रह लेगे।पुलिस पर तो आरोप क्या हर कोई कहता है चोर और अपराधी से मिला है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे है कि पुलिस ही अपराध करा रहा है। तीन दिन थाना बंद करके देख लिजिए। समाज में इतना ही दम है तो चला कर देख लिजिए ।चोर को या अपराधी को पुलिस किसके लिए पिटता है पिटना गलत है मैं भी मानता हूं लेकिन हमारे पास पिटाई के अलावा कोई और व्यवस्था है जिससे किसी अपराधिक घटनाओ को सुलझाया जा सके ।
इतने जो लोग चीख चीख कर भाषण दे रहे हैं कभी वो पुलिस के थाने में जहां वो रात गुजारता है चले जाये एक दिन वो रह जाये तो मान जायेगे।फिर समाज के प्रबुद्ध लोगो से आग्रह है 5 घंटे थाना के कार्यकलाप में शामिल होकर देखे, टीवी में या फिर कारगिल चौक से भाषण देना आसान है।
पुलिस क्यों फर्जी इनकाउटंर करती है इस पर कभी सोचे हैं पुलिस के पास जब कोई विकल्प नही बचता है तब उसको मारता है किसके लिए अमन चैन देश में और समाज में कायम रहे। आप छोटा कोई क्रायम करिए जमानत लेने में हालत खराब हो जायेगा लेकिन वैसे अपराधी को जेल भेजिए आज गया और कल बाहर ।और बाहर निकलते ही क्रायम शुरु आप गवाही नही दिजिएगा कोर्ट तारीख पर तारीख देगा कैसे चलेगा व्यवस्था। पुलिस को गाली देने से समस्या का समाधान हो जायेगा। पंजाब के आंतकियों को क्या बातचीत से पटरी पर लाया गया।
केपीएस गिल के दहशत से पंजाब नियंत्रण में आया और बाद में क्या हुआ गिल के साथ काम करने वाले कई आईपीएस अधिकारियो को जेल जानी पड़ी कई ने तो आत्महत्या कर लिया। किसके लिए ठिक है उस दौर में कई निर्दोश लोग भी मारे गये लेकिन पुलिस के पास दशहत फैलाने के अलावे और कोई ट्रेनिंग नही दी जाती है जब स्थिति नियत्रंण से बाहर होने लगती है तभी पुलिस इस तरह के एक्सन में आती है। और इस दौरान कई निर्दोश लोग भी मारे जाते हैं।लेकिन शांति के लिए समाज और देश को इस तरह कि किमत तो चुकाना ही पड़ेगा।नही तो तैयार रहिए आ रहा है नक्सली अब हमारी बारी तो खत्म होने पर है।संतोष जी कभी नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अप्रेशन के दौरान साथ चलिए फोर्स कितना टूट चुका है इसका एहसास हो जायेगा।फोर्स का मनोबल इतना गिर गया है कि कोई हमला होता है तो पुलिस लड़ने के लिए नही जान बचाने के लिए गोली चलाता है और तब तक गोली चलाता रहता है जब तक कि बच कर निकल नही जाता है। क्यों नही समस्या का समाधान हो रहा है। नक्सल इलाके में विकास नही हुआ इसके लिए पुलिस जिम्मेवार है क्या, जगंल का दोहन हो रहा है इसके लिए पुलिस जिम्मेवार है ,विकास गांवो तक नही पहुंचा इसके लिए पुलिस जिम्मेवार है ,जमीन के विवाद का हल नही हो रहा है, इसके लिए पुलिस जिम्मेवार है, देश में फैल रहे आंतकवाद के लिए पुलिस जिम्मेवार है क्या।जब हम जिम्मेवार नही है तो फिर मुझे इन समस्याओ के कारण उपजे आक्रोश को शांत करने की जिम्मेवारी क्यो दी जा रही है जब कि सबको पता है कि पुलिस का क्या काम है। हम ज्यादा परेशान हुए दिन का चैन और रात की नींद लूटी तो फिर हम वही करेगे जो इशरत के साथ किया गया । इसको कोई रोक नही सकता सारे सिस्टम को साथ मिलकर काम करने की जरुरत है और रही बात पुलिस को संतोष जी आप याद रखिएगा किसी भी राज सत्ता का प्रतीक पुलिस होता है और पुलिस को जिस तरीके से साधन विहिन रखा जा रहा है नुकसान उठाने के लिए तैयार रहिए। नये लड़के जो आ रहे हैं ना उन्हे कोई कमीटमेंन्ट नही है समाज ,व्यवस्था और देश के प्रति नौकरी छोड़ने में इन नये लड़के को वक्त नही लगता है। टाईलेन्टेंड लड़के आ रहे हैं उनसे आप ज्यादा कुछ करा भी नही सकते हैं कप्तान और खेलाड़ी दोनो का वही हाल है एमएम पास पुलिस बन रहा है ।उसको अपना डियूटी पता हो या न हो राईट जरुर पता है।पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैंस करिए सुविधा दिजिए काम का बोझ कम किजिए मानवीय व्यवहार मिलेगा नही तो चलिए इसी तरह आरोप प्रत्यारोप चलता रहेगा। और एक समय बाद पुलिस वेतन लेगी और घर जायेगी लोग भुगतते रहेगे।
उस आईपीएस अधिकारी के परिवार के बारे में कभी सोचा है किसके लिए फर्जी इनकाउंटर किया ।पंजाब में एक दर्जन से अधिक आईपीएस अधिकारी या तो जेल में है या फिर सोसोईड कर लिया है किसके लिए पुलिस वालो की जमीन जोत लिया या फिर बहु बेटी का इज्जत ले लिया। सोचिए संतोष जी आने वाला वक्त बेहद मुश्किल होने वाला है। आपसे अपना दर्द इसलिए शेयर कर रहा हूं कि मुझे लगता है आप इस सच से समाज को अवगत करायेगे और लोगो में पुलिस के प्रति नजरिया बदलेगा। बाय चलिए आज मुलाकात होनी चाहिए साथ व़ृदावन का डोसा खाते हैं।

 

साभार : रंजू संतोष

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